ऊष्मा किसे कहते हैं – Ushma Kise Kahate Hain

Ushma kise kahate Hain: ऊष्मा किसे कहते हैं? यदि आप भी ऊष्मा की परिभाषा, ऊष्मा के प्रकार के बारे में जानना चाहते है तो आज के इस आर्टिकल में हम आपको ऊष्मा का मात्रक, यूनिट, ऊष्मीय प्रसार और विशिष्ट ऊष्मा किसे कहते हैं इसके बारे में जानकारी देंगें।

ऊष्मा की परिभाषा – Definition of heat in Hindi

ऊष्मा एक प्रकार की ऊर्जा है, जब दो वस्तुओं के तापमान अंतर हो तो यह यह ऊर्जा एक वस्तु से दूसरी वस्तु में स्थानांतरण (ट्रांसफर) होती है। ऊष्मा को अंग्रेजी में हीट (Heat) कहा जाता है।

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ऊष्मा को मापने की इकाई

ऊष्मा की यूनिट – जूल होती है।

  • 1 जूल = 0.24 कैलोरी
  • 1 कैलोरी= 4.18 जूल

तापमान को मापने की इकाई (यूनिट)

  • सेल्सियस (Celsius)
  • फ़ारेनहाइट (Fahrenheit)
  • केल्विन (Kelvin)

महत्वपूर्ण जानकारी

  • पानी 0°C पर जमता है।
  • मनुष्य के शरीर का सामान्य तापमान 37°C या 98°F होता है।
  • पानी 100°C पर उबलता है।

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ऊष्मीय प्रसार – Thermal Expansion in Hindi)

जब किसी पदार्थ को जब हम ऊष्मा देते है तो उसका आयतन बढ़ता है लगभग सभी द्रव को गर्म करने पर उनका आयतन बढ़ता है।

परन्तु पानी को गर्म करने पर 0°C से 4°C तक उसका आयतन घटता है फिर 4°C के बाद उसका आयतन बढ़ता है। इसे ही पानी का असामान्य प्रसार (Anomalous expansion of water) कहते है।

पानी के असामान्य प्रसार के उदाहरण

1.  ठन्डे प्रदेशों में तालाबों के जम जाने पर भी मछलियां जीवित रहती है, क्योंकि जल के जमने की प्रोसेस ऊपर से नीचे होती है। पानी की सतह पर तो तापमान 0°C रहता है, पर अंदर 4°C रहता है। इसलिए ठन्डे प्रदेशों में तालाबों के जम जाने पर भी मछलियां जीवित रहती है।

2.  ठण्ड में पाइप का फटना अधिकतर द्रव जमने पर सिकुड़ते है पर पानी जमने पर फैलता है, इसलिए ठण्ड में पाइप अक्सर फट जाते है।

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ऊष्मा का संचरण – Transmission of Heat in Hindi

जब ऊष्मा एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाती है, तो उसे हम ऊष्मा का संचरण (Transmission of Heat) कहते है।

ऊष्मा का संचरण की तीन विधि है –

चालक (Conduction) – ऊष्मा संचरण की इस विधि में किसी वस्तु में ऊष्मा का संचरण उस वस्तु के अणुओं द्वारा अपना स्थान परिवर्तित किये बिना होता है।

संवहन (Convection) – ऊष्मा संचरण की इस विधि में किसी वस्तु में ऊष्मा का संचरण उस वस्तु के अणुओं द्वारा अपना स्थान परिवर्तन के साथ होता है।

विकिरण (Radiation) – ऊष्मा संचरण की इस विधि में माध्यम की आवश्यकता नहीं होती। सूर्य से पृथ्वी पर ऊष्मा का पहुँचना, विकिरण ऊष्मा संचरण विधि का सरल उदाहरण है।

उदाहरण – रेगिस्तान दिन में बहुत गर्म तथा रात में बहुत ठंडा होता है। कारण- रेत ऊष्मा की अच्छी अवशोषक होती है और ऊष्मा का अच्छा अवशोषक अच्छा उत्सर्जक होता है।

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ऊष्मा चालकता के आधार पर हम पदार्थ का वर्गीकरण तीन प्रकार से कर सकते है –

चालक (Conductor) – जिन पदार्थ में ऊष्मा का संचरण सरलता से हो जाये, उसे चालक कहते है। पानी, मानव शरीर, पारा आदि ऊष्मा के चालक है।

नोट:- पारा ऊष्मा का सबसे अच्छा चालक होता है।

बेड कंडक्टर (Bed Conductor) – जिन पदार्थ में ऊष्मा का संचरण सरालता से ना हो, उनको हीट बेड कंडक्टर कहते है। जैसे – लकड़ी, कांच, हवा और रबर आदि।

ऊष्मारोधी (Thermal Insulator) – जिन पदार्थ में ऊष्मा का संचरण बिलकुल भी नहीं होता हो, उनको ऊष्मा को कुचलक कहते है। एबोनाइट एक ऊष्मारोधी पदार्थ है।

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कुछ महत्वपूर्ण जानकारी

  • न्यूनतम ताप -273°C तक संभव है।  
  • प्रेशर कुकर में चावल जल्दी पकता है क्योंकि दाब बढ़ाने से पानी का क्वथनांक (Boiling Point) बढ़ जाता है।
  • सफ़ेद कपड़े, काले कपड़ों की तुलना में ठन्डे होते है, क्योंकि एक सफ़ेद चिकनी सतह ऊष्मा की खराब अवशोषक और अच्छी उत्सर्जक होती है।

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